Pakistan Visa Ban : गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर सिख जत्थे को पाकिस्तान जाने की अनुमति नहीं

पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान जाने पर लगी पाबंदियां, ऑपरेशन सिंदूर के बाद कॉरिडोर तत्काल प्रभाव से बंद

Pakistan Visa Ban :  भारत के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है, जिसका असर दोनों देशों के बीच होने वाली धार्मिक यात्राओं पर भी दिख रहा है। इसी कड़ी में, केंद्र सरकार ने इस साल गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर पाकिस्तान के ननकाना साहिब जाने वाले सिख जत्थे को अनुमति नहीं दी है।

यह कोई पहली बार नहीं है। इससे पहले, जून 2025 में गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस पर लाहौर जाने वाले और जुलाई में शिवरात्रि के मौके पर श्री कटासराज मंदिर जाने वाले जत्थों को भी पाकिस्तान जाने की अनुमति नहीं मिली थी।

सिख जत्थों पर प्रतिबंध क्यों है उचित? : केंद्र सरकार के इस फैसले को लेकर कुछ राजनीतिक हल्कों में भले ही विरोध हो, लेकिन मौजूदा सुरक्षा हालात और इतिहास को देखते हुए यह एक समझदारी भरा कदम है। इसका मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

इतिहास से सबक : पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारों की यात्राएं हमेशा से बाधित रही हैं। 1947 के विभाजन के बाद ननकाना साहिब और करतारपुर साहिब जैसे पवित्र स्थल पाकिस्तान में चले गए। इसके बाद भी कई बार तीर्थयात्राएं रुकीं:

  • 1965 के युद्ध के बाद: जसर जैसे पुलों के टूटने से सीमा पार यात्राएं बंद हो गईं।
  • जून 2019: सुरक्षा कारणों से लगभग 150 श्रद्धालुओं को अटारी सीमा पर रोका गया।
  • मार्च 2020 – नवंबर 2021: नवंबर 2019 में खोला गया करतारपुर कॉरिडोर कोविड महामारी के कारण 20 महीने तक बंद रहा।
  • मई 2025: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद कॉरिडोर तुरंत बंद कर दिया गया और लगभग 150 श्रद्धालुओं को वापस लौटना पड़ा।
  • यह साफ है कि जब भी राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा आया है, सरकार को तीर्थयात्रा पर रोक लगानी पड़ी है।

यह साफ है कि जब भी राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा आया है, सरकार को तीर्थयात्रा पर रोक लगानी पड़ी है।

पाकिस्तान का दोहरा चेहरा : पाकिस्तान खुद को सिख धरोहर का संरक्षक बताता है, लेकिन वहां अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार कठोर रहा है। वहां मंदिर तोड़े गए, जबरन धर्म परिवर्तन हुए और गुरुद्वारों की उपेक्षा हुई। इसके अलावा, भारत से जाने वाले जत्थों को अक्सर खालिस्तानी प्रचार का सामना करना पड़ता है। यह आस्था नहीं, बल्कि एक राजनीतिक चाल है।

मौजूदा हालात : पहलगाम में हुए आतंकी हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद की स्थिति बेहद संवेदनशील है। ऐसे समय में बड़ी संख्या में नागरिकों को पाकिस्तान भेजना खतरे से खाली नहीं। खिलाड़ियों की तुलना में श्रद्धालु खुले और आसान निशाने हो सकते हैं, जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का पहला कर्तव्य है।

निष्कर्ष : सिख समुदाय हमेशा राष्ट्र के साथ खड़ा रहा है और वह जानता है कि नागरिकों की सुरक्षा राज्य का सबसे पहला कर्तव्य है। यह पाबंदी श्रद्धा पर रोक नहीं, बल्कि सुरक्षा की जिम्मेदारी है। हमारे लिए गुरुद्वारे हमेशा पवित्र हैं, लेकिन नागरिकों का जीवन और राष्ट्र की अखंडता सबसे बढ़कर है।

Manu Mehta

मनु मेहता पिछले लगभग 18 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों (ANI News, News Express, TV 9,… More »
Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker!